Let’s live for our passion again.

” आंखे बंद करते ही आज फिर वही लम्हा याद आता है ,

 जब जीवन में बचपन पहली दफा खुल के मुस्कुराता है ,

जब माँ के प्यार की चादर ओढ़ के सुकून से सोया करते थे,

 नजाने उन गहरी रातों में कितने रंगीन ख्वाब हम बुना करते थे ,

रब जाने कब पापा ने ऊँगली पकड़ के हमको चलना सिखा दिया ,

 हम तो साधारण थे , नजाने कैसे इक काबिल इंसान बना दिया ,

याद आती हैं वो किताबें जिन्हें हमने कभी खोला नहीं ,

 याद आते हैं वो खिलौने जिन्हें हमने कभी छोड़ा नहीं ,

 वक़्त को दोष क्यों देना जब हम ही दूर निकल आये ,

औरों से क्या गिला करना जब हम ही कर्तव्य ना निभा पाए ,

 सोचा था बड़े होके एक दिन, हम भी यूँ हुकुम चलाएंगे ,

 मालूम न था औरों की तरह, जीवन की उलझनों में फस के रह जायेंगे ,

 कहने को अब भी मुझमे ज़िंदा है , जो मुझमे इक कलाकार था ,

 वक़्त भी उस से शर्मिंदा है , क्योंकि जानता है वो अत्याचार था ,

अभी कुछ बिगड़ा नहीं , वक़्त खुद तेरी खातिर रुका है ,

 तेरे दिल के फ़ैसले पर , उसका जीवन टिका है ,

बचपन के उस ज़ज़्बे में आओ फिर से जान डालें ,

 तुम्हारे अस्तित्व में क्यों ना आज इक नयी पहचान डालें ,

 माँ बाप के चेहरे पे क्यों न फिर वो मुस्कान डालें ,

 फिर वही हाथ पकड़ इस जीवन में गौरव और सम्मान डालें । “

To all those who left their passion for the sake of some predetermined career. Better late than never, lets start all over again , let us live our for ourselves once again, let’s give way to the fire that struggled till now and survived somehow.

lets live for our passion

lets live for oneself

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